व्यक्तिगत परिचय

डॉ. सुशीलचंद्र त्रिवेदी ‘मधुपेश’
ग्राम जीवन की समस्याओं—अशिक्षा, भुखमरी, बेरोजगारी व कुप्रथाओं—को देखकर डॉ. त्रिवेदी ने समाजसेवा का व्रत लिया। उन्होंने सार्वजनिक शिक्षोन्नयन संस्थान की स्थापना कर शिक्षा, कौशल विकास व नशा-निवारण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए। ग्रामीण जीवन के उत्थान हेतु उन्होंने सरकारी योजनाओं को भी समाज तक पहुँचाया।

वृद्धजन सेवा को अपना प्रमुख ध्येय बनाकर उन्होंने उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों में वृद्धाश्रम संचालित किए। जिनमें लखनऊ कानपुर झाँसी हरदोई और नैमिषारण्य वर्तमान समय मे चल रहे हैं जहाँ प्रति वृद्धाश्रम संख्या 150 है । उनके द्वारा संचालित कृष्ण कुटीर महिला आश्रय सदन, वृंदावन देश की एकमात्र ऐसी संस्था है जहाँ 1000 माताओं के लिए रोजगारयुक्त जीवन की व्यवस्था है।

उनकी सेवाओं के लिए भारत सरकार ने उन्हें ‘वयोश्रेष्ठ सम्मान 2018’ से अलंकृत किया। पूर्व राज्यपाल राम नाइक एवं वर्तमान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल द्वारा समय-समय पर उनके कार्यों की सराहना की जाती रही है।

साहित्यिक परिचय

बाल्यकाल से ही विपन्न ग्राम जीवन में व्याप्त अशिक्षा, भुखमरी, बेरोजगारी, बीमारी एवं कुप्रथाओं से जकड़े हुए  समाज को देखकर  डॉ. सुशीलचंद्र त्रिवेदी के मन में एक चिंता का भाव सदैव बना रहा और इसी भाव के कारण उन्होंने समाज की सेवा का व्रत लिया। समाज के कठिन जीवन का अनुभव करने वाले त्रिवेदी जी ने सर्वप्रथम प्रथम अपने ही गांव में सार्वजनिक शिक्षोन्नयन  संस्थान नाम से पूर्व माध्यमिक विद्यालय की आधारशिला रखी। यह उनके जीवन में एक क्रांतिकारी कदम था। त्रिवेदी जी ने अपने विचारों को विस्तार दिया। सेवा भाव के लिए उन्होंने जिस संस्था के संचालन का कार्य आरम्भ किया उसके लिए उन्होंने निरंतर प्रयास किया और उसी प्रयास का परिणाम था कि ग्रामीण जनों को उच्च शिक्षा के साथ ही साथ कौशल विकास से जोड़ने सरहनीय प्रयास किया। ‘मधुपेश’ उपनाम से सुविख्यात त्रिवेदी जी भविष्य द्रष्टा हैं।

Our Journey

1970

OUR NGO

हमारे कार्य

बाल कल्याण एवं संरक्षण में शिक्षण क्षेत्र का कार्यानुभव

बाल कल्याण एवं संरक्षण में प्रशिक्षण क्षेत्र का कार्यानुभव

बाल कल्याण एवं संरक्षण में चिकित्सा क्षेत्र का कार्यानुभव

बाल कल्याण एवं संरक्षण में अन्य क्षेत्रों का कार्यानुभव

बाल कल्याण एवं संरक्षण क्षेत्र में स्थापित प्रकल्प

बाल कल्याण एवं संरक्षण क्षेत्र में प्रकाशन

बाल कल्याण एवं संरक्षण क्षेत्र में अतिरिक्त कार्यानुभव

साहित्यिक-वृत्त

साहित्यिक यात्रा वृत्त – माँ वीणापाणि की विशेष अनुकम्पा से बाल्यकाल से ही मेरी शिक्षा और दीक्षा सभी भाषाओं की जननी संस्कृत भाषा से हुई। जिसमें भूमण्डल का सबसे आधुनिक भाषा साहित्य सृजन हुआ, वेदों और पुराणों की रचना स्वयं जगत नियंता ईश्वर के संचालन और संहार उद्घाटित हुआ। पूर्व मध्यमा और उत्तर मध्यमा की शिक्षा श्री यशवंत सिंह चौहान आचार्य श्री शिव संकट हरण संस्कृत महाविद्यालय सकाहा, हरदोई में पूरी कर काशी विश्वनाथ के विश्व विख्यात साहित्य नगरी वाराणसी सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय से स्नातक-शास्त्री की शिक्षा-दीक्षा हेतु प्रवेश ग्रहण की अनुक्रमणिका हुई। 

डॉ. सुशीलचंद्र त्रिवेदी

नाम : डॉ. सुशीलचंद्र त्रिवेदी “मधुपेश”

पिता का नाम : स्व. श्री बाबूराम त्रिवेदी

माता का नाम : स्व. श्रीमती रेशम त्रिवेदी

जन्म तिथि : 31 जुलाई, 1955

जन्म स्थान : पाली, जनपद- हरदोई, (उ०प्र०)

योग्यता : एम०ए०, एम०एड०, पीएच-डी.

जीवन-वृत्त

व्यक्तिगत परिचय

सामाजिक कार्यवृत्त

साहित्यिक कार्यवृत्त

राजनीतिक कार्यव्रत

डॉ. सुशीलचंद्र त्रिवेदी 'मधुपेश'

साहित्यिक जीवन

बाल्यकाल से ही विपन्न ग्राम जीवन में व्याप्त अशिक्षा, भुखमरी, बेरोजगारी, बीमारी एवं कुप्रथाओं से जकड़े हुए  समाज को देखकर  डॉ. सुशीलचंद्र त्रिवेदी के मन में एक चिंता का भाव सदैव बना रहा और इसी भाव के कारण उन्होंने समाज की सेवा का व्रत लिया। समाज के कठिन जीवन का अनुभव करने वाले त्रिवेदी जी ने सर्वप्रथम प्रथम अपने ही गांव में सार्वजनिक शिक्षोन्नयन  संस्थान नाम से पूर्व माध्यमिक विद्यालय की आधारशिला रखी। यह उनके जीवन में एक क्रांतिकारी कदम था। त्रिवेदी जी ने अपने विचारों को विस्तार दिया। सेवा भाव के लिए उन्होंने जिस संस्था के संचालन का कार्य आरम्भ किया उसके लिए उन्होंने निरंतर प्रयास किया और उसी प्रयास का परिणाम था कि ग्रामीण जनों को उच्च शिक्षा के साथ ही साथ कौशल विकास से जोड़ने सरहनीय प्रयास किया। ‘मधुपेश’ उपनाम से सुविख्यात त्रिवेदी जी भविष्य द्रष्टा हैं।

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