साहित्यिक परिचय

साहित्यिक यात्रा वृत्त- माँ वीणापाणि की विशेष अनुकम्पा से बाल्यकाल से ही मेरी शिक्षा और दीक्षा सभी भाषाओं की जननी संस्कृत भाषा से हई। जिसमें भूमण्डल का
सबसे आद्य‌कालीन भाषा साहित्य सृजन हुआ, वेदों और पुराणों की रचना स्वयं जगत नियंता ईश्वर के संचालन और संहार उद्घाटित हुआ। पूर्व मध्यमा और उत्तर मध्यमा की शिक्षा श्री यशवन्त सिंह चौहान आचार्य श्री शिव संकट हरण संस्कृत महाविद्यालय सकाहा, हरदोई में पूरी कर काशी विश्वनाथ के विश्व विख्याात साहित्य नगरी वाराणसी में स्थित सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय से स्नातक-शास्त्री की शिक्षार्जन हेतु भोलेनाथ की अनुकम्पा हई। यहीं श्री बटुकनाथ शास्त्री खिस्ते, श्री शिव जी उपाध्याय, पं० सीताराम चतुर्वेदी आदि विद्वानों के मार्गदर्शन एवं हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्य जगत के स्तम्भ डॉ० हजारी प्रसाद द्विवेदी के आशिर्वाद स्वरूप काव्य रचना का सूत्रपात हुआ और शैनः शैनेः बनारस के समस्त मनीषियों की सुविख्याति संस्था ‘कवि भारती’ द्वारा आयोजित काव्यगोष्ठियों, काव्यदुपहरी, सायंकालीन काव्यपाठ आधार रहा। समय की गतिशीलता और जीवन की अविरलता से शास्त्री व आचार्य करने के उपरान्त संस्कृत साहित्य जगत के ध्रुव नक्षत्र के विद्वान् शिरोमणि डॉ० शिव बालक द्विवेदी के सानिध्य में दशरूपक और साहित्य दर्पण के नाट्य तत्वों का तुलनात्मक अनुशीलन” विषय पर पीएच-डी. की उपाधि के लिए शोध कार्य के साथ साहित्य लेखन का कार्य अनवरत् रूप से चलता रहा साथ ही कानपुर से प्रकाशित एक मात्र संस्कृत भाषा का समाचार-पत्र के सहसम्पादन का कार्य चलता रहा।
अपने अल्पकालिक राजस्थान प्रदेश के प्रवास के समय वहाँ की संस्कृति, वीरगाथाओं को लेखनीबद्ध कर ‘अपना राजस्थान’ काव्य रचना का परायण हुआ।

मेरे प्रेरणास्रोत विपरीत परिस्थितियों को भी अनुकूलता में परिवर्तित करने की क्षमता के धनी, कुशल, नेतृत्वकर्ता और शत्रुओं के मन पर भी राज करने वाले नेताजी सुभाष
चन्द्र बोस के कृतित्त्व को दीपक की भाँति ‘मृत्युंजय सुभाष’चन्द्र बोस के कृतित्त्व को दीपक की भाँति ‘मृत्युंजय सुभाष’ के रूप में साहित्य जगत में दीप्तिमान है।
सी.एस.एन. महाविद्यालय, हरदोई को विभागाध्यक्ष
साहित्य भूषण से सम्मानित मूर्धन्य विद्वान् डॉ० शिव बालक शुक्ल के मार्गदर्शन एवं डॉ० के.के. अवस्थी, श्री सत्यवीर प्रकाश आर्य, श्री निशानाथ अवस्थी आदि
साहित्याकारों से अनवरत् साहित्यिक चर्चा-परिचर्चा से साहित्य साधना से बल मिलता रहा। साथ ही साहित्य सम्मेलनों व एवं काव्य सम्मेलनों में सक्रिय सहभागिता भी जारी है।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद में राष्ट्रधर्म के प्रबन्धक व मेरे अनुज श्री पवनपुत्र बादल के साथ साहित्य की अविरल धारा में जुड़कर कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। माँ शारदे की कृपा से अखिल भारतीय साहित्य परिषद के वर्तमान राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के दायित्व का निर्वहन कर साहित्य धारा में प्रवाहमान है। श्रद्धेय श्री श्रीधर पड़ारकर, श्री ऋषि कुमार मिश्र तथा डॉ० रविन्द्र शुक्ल व देश के अन्य श्रेष्ठ साहित्यकारों के साथ अण्डमान-निकोबार से काश्मीर तक तथा असम से गुजरात तक
साहित्य की अविरल धारा को संगोष्ठियों, काव्य सम्मेलनों आदि से निर्वाध रूप से 555 प्रवाहित करने का प्रयास निरन्तर किया जा रहा है। देश ही नहीं विदेशी सरज़मी पर भी जैसे थाईलैण्ड, कम्बोडिया आदि देशों में साहित्यि यात्रा के माध्यम से भारतीय संस्कृति के पोषक राष्ट्र हितेषी सांस्कृतिक साहित्य का प्रकाशन, संकलन और समाज में प्रचलन करने का प्रयास निरन्तर हो रहा है।

अखिल भारतीय साहित्य परिषद द्वारा आयोजित राष्ट्रपति महामहिम श्री रामनाथ कोविन्द जी के अभिनन्दन समारोह में पूर्व उपप्रधानमंत्री श्री लाल कृष्ण आडवाणी जी, श्री लालजी टण्डन तथा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. सुशीलचंद्र त्रिवेदी 'मधुपेश'

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