11.51-52 वृद्धाश्रम

समाज में भौतिक वादिता के अन्धा अनुकरण के चलते आजकल बजा की उपेक्षा से समाज में निराश्रित वृद्धों की संख्या निरन्तर बढती जा रही है। इस समस्या को देखते हुए महिला कल्याण निगम लखनऊ उ.प्र. की सहायता से झाँसी तथा कानपुर नगर में प्रति केन्द्र 100 महिलाओं के लिए वृद्धाश्रम प्रारम्भकिया गया। आश्रम के गुणवत्तायुक्त सेवाभाव को देखकर समाज कल्याण विभाग द्वारा प्रायोजित झाँसी, कानपुर नगर, नैमिष-सीतापुर, हरदोई तथा लखनऊ में प्रति आश्रम 150 वृद्धजनों के लिए निःशुल्क मोजन आवास तथा चिकित्सा आदि व्यवस्थाओं को उपलब्ध कराकर संचालन का कार्य किया जा रहा है। इस प्रकार कुल आश्रयहीन 1500 बुजुर्गों हेतु सेवाकार्य किया जा रहा है।

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1.वृद्धाश्रम सरोजनी नगर, लखनऊ


नवाबों का शहर लखनऊ, जिसे कभी नज़ाकत और नफ़ासत के लिए पहचाना जाता था, आज बढ़ती जनसंख्या और भौतिकवादी परिवेश के कारण तेजी से बदल रहा है। नई पीढ़ी आधुनिकता की दौड़ में इतनी व्यस्त होती जा रही है कि कई बार बुजुर्ग माता-पिता को अकेले जीवन यापन के लिए मजबूर होना पड़ता है। ऐसे में वे किसी ऐसे स्थान की तलाश में रहते हैं, जहाँ उनके अकेलेपन को दूर किया जा सके और उन्हें परिवार जैसा वातावरण मिले।
इसी उद्देश्य से सार्वजनिक शिक्षोन्नयन संस्थान ने अमौसी हवाई अड्डे के समीप, हैंड़िल नहर रोड, सरोजिनी नगर, लखनऊ में एक वृद्धाश्रम की स्थापना की है, जिसे समाज कल्याण विभाग द्वारा प्रायोजित किया गया है। यह आश्रम उन वयोवृद्ध दादी–बाबा के लिए आश्रयस्थल है, जो किसी भी कारणवश अपने जीवन के अंतिम समय में अकेले रह जाने को विवश हैं और जिन्हें देखभाल एवं अपनापन की आवश्यकता है।
उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण विभाग के माननीय मंत्री श्री रमापति शास्त्री जी ने भी इस संस्थान की गुणवत्ता की सराहना की है। इसके अलावा निदेशक समाज कल्याण, अपर निदेशक, सामाजिक कल्याण अधिकारी तथा स्थानीय जनप्रतिनिधि समय-समय पर आश्रम का निरीक्षण करते रहते हैं। अन्य कई स्वैच्छिक संस्थाएँ भी यहाँ आने वाले बुजुर्गों के लिए विविध कार्यक्रम आयोजित करती रहती हैं।
Address – Hiralal Dharamshala, Little Angel Inter College, N.Hadil Chauraha, Sarojini Nagar, Lucknow, Uttar Pradesh 226008

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कानपुर नगर, जो कभी औद्योगिक वैभव और कपड़ा मिलों की समृद्धि के लिए प्रसिद्ध था, समय के साथ मिलों के बंद होने के कारण गम्भीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करने लगा। परिणामस्वरूप वहाँ कार्यरत अनेक कर्मचारी बेरोजगार हो गए। आज वही लोग वृद्धावस्था में अत्यंत दयनीय परिस्थितियों—कठिन जीवन, दो समय के भोजन की चिंता और बेघर होने की पीड़ा—का सामना कर रहे हैं। अनेक बुजुर्ग तो भुखमरी के कगार पर पहुँच गए।

ऐसे ही ज़रूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित, सम्मानजनक व स्नेहपूर्ण आश्रय प्रदान करने के उद्देश्य से सार्वजनिक शिक्षोन्नयन संस्थान द्वारा एक वृद्धाश्रम की स्थापना की गई। यह आश्रय स्थल वर्तमान में 136 दादी–बाबाओं का घर बन चुका है, जबकि कुल 150 संवासी पंजीकृत हैं। यह समाज कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा प्रायोजित एवं सहयोगित है।

आश्रम में बुजुर्गों की सुख–सुविधाओं और मनोरंजन का विशेष ध्यान रखा गया है।

मनोरंजन हेतु टीवी तथा कैरम, लूडो, चेस जैसे इंडोर गेम्स की व्यवस्था उपलब्ध है।

पूरा परिसर सीसीटीवी कैमरों से सुसज्जित है, जिससे सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुबह के जागरण से लेकर रात्रि विश्राम तक एक सुचारु एवं स्वास्थ्यवर्धक दिनचर्या निर्धारित है।

मौसम और आवश्यकता के अनुसार तैयार किया गया पौष्टिक भोजन प्रतिदिन निःशुल्क प्रदान किया जाता है।

इसके अतिरिक्त, दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली आवश्यक वस्तुएँ भी आश्रम द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।

आत्मिक शांति एवं सकारात्मक वातावरण हेतु नियमित पूजन–भजन एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

यह वृद्धाश्रम केवल एक आश्रय स्थल नहीं, बल्कि उन सभी बुजुर्गों के लिए सम्मान, सुरक्षा, सेवा और परिवार जैसे वातावरण का संगम है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन समाज को समर्पित किया और आज स्नेह व सहयोग के पात्र हैं।
Add- 452, Old Age Home Near Vaishno Devi Temple, Damodar Nagar Kanpur Nagar

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सार्वजनिक शिक्षोन्नयन संस्थान द्वारा संचालित एवं समाज कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा प्रायोजित दतिया–ग्वालियर रोड स्थित वृद्धाश्रम क्षेत्र के लगभग 150 वयोवृद्ध जनों के लिए सुरक्षित एवं सम्मानपूर्ण आश्रय स्थल के रूप में कार्य कर रहा है। वर्तमान में यहाँ 134 पंजीकृत संवासी निवासरत हैं, जिन्हें संस्थान द्वारा सम्पूर्ण निःशुल्क सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं।

आश्रय गृह में प्रतिदिन सभी बुजुर्गों को पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वच्छ आवास, नियमित चिकित्सा सेवाएँ तथा दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्री प्रदान की जाती है। इन सभी सेवाओं का उद्देश्य उन्हें आत्मनिर्भर, सुरक्षित तथा स्वास्थ्यपूर्ण जीवन प्रदान करना है।
नगरवासियों द्वारा होली, दिवाली एवं अन्य त्यौहारों के अवसर पर आश्रम में आकर बुजुर्गों के साथ समय बिताना एक संवेदनशील परंपरा के रूप में विकसित हो रहा है। उनकी उपस्थिति एवं सहयोग से आश्रम में धीरे–धीरे आत्मीयता और मानवीय जुड़ाव का वातावरण गहराता जा रहा है। जिन्होंने कभी जीवन से आशा खो दी थी, वे पुनः समाज के प्रेम और सम्मान को महसूस कर नई उमंग और उत्साह के साथ आशान्वित हो रहे हैं।
Add- Behind ITI, Masjid Wali Gali, Siddheshwar Nagar, Jhansi

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गंगा और गोमती के पावन संगम क्षेत्र के मध्य स्थित पवित्र प्रह्लाद नगरी, हरदोई, नगर के कोलाहल से लगभग 10 किलोमीटर दूर, हरीतिमा से आच्छादित प्रकृति की अद्भुत, मनमोहक और शांत सुन्दरता से परिपूर्ण वातावरण में सार्वजनिक शिक्षोन्नयन संस्थान की पुण्यभूमि पर स्थापित “मातृ-पितृ छाया सदन”, अपनेपन की अनुभूति कराने वाला एक ऐसा पावन परिसर है जहाँ कदम रखते ही मन को सुकून और आत्मा को शांति मिलती है।

करीब 150 आश्रित बुजुर्गों के लिए यह आश्रम न सिर्फ एक आवास है, बल्कि स्नेह, सम्मान और आत्मिक आनंद की अविरल धारा बहाने वाला एक स्नेह-सरोवर है। यहाँ निवास करने वाले प्रत्येक वृद्ध जन को परिवार जैसा वात्सल्य, देखभाल और सुरक्षा प्राप्त होती है। आश्रम के प्रांगण में बुजुर्गों के चेहरों पर मुस्कान और उनके हृदयों में संतोष की लहरें निरंतर स्पंदित होती रहती हैं।
संस्थान द्वारा आश्रम में रहने वाले सभी बुजुर्गों को आवास, भोजन, चिकित्सा, मनोरंजन एवं दैनिक आवश्यकताओं की सभी सुविधाएँ पूरी तरह निःशुल्क प्रदान की जाती हैं। यह आश्रम समाज कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रायोजित एवं समर्थित है, जिससे यहाँ की व्यवस्था और सेवाएँ और भी अधिक सुव्यवस्थित एवं विश्वसनीय बनती हैं। मातृ-पितृ छाया सदन एक ऐसी दिव्य स्थली है जहाँ सेवा ही धर्म है, सम्मान ही संस्कृति है और बुजुर्गों की मुस्कान ही सबसे बड़ा आशीर्वाद।
Add – Public Educational Institute, Allipur, Hardoi

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अठ्ठासी हज़ार ऋषियों की तपस्थली, गोमती के पावन तट पर स्थित प्राकृतिक, शांत एवं दिव्य वातावरण के मध्य, निरंतर प्रवाहित चकतीर्थ के पवित्र जल के सान्निध्य में तथा देवी माँ के 51 शक्तिपीठों में प्रतिष्ठित माँ ललिता देवी मंदिर के मार्ग पर सार्वजनिक शिक्षोन्नयन संस्थान द्वारा समाज कल्याण विभाग के सहयोग से एक पवित्र एवं मानव–सेवा को समर्पित वृद्धाश्रम की स्थापना की गई है।

अपने सांसारिक कर्तव्यों की पूर्णता के पश्चात् ईश्वर-स्मरण एवं मन की स्थिरता की आकांक्षा लिए जब बुजुर्ग दादी–बाबा अपने पारिवारिक जीवन से अलग होकर या ईश्वरीय इच्छा के कारण आश्रयविहीन हो जाते हैं, तब यह दिव्य धाम उनके लिए जीवन का नया सहारा बनकर उभरता है। लगभग 150 वयोवृद्धों की सेवा का महान उत्तरदायित्व संस्थान के कर्मठ, संवेदनशील एवं समर्पित समाजसेवी कार्यकर्ता निष्ठा और करुणा के साथ दिन-रात निभा रहे हैं।
आश्रम में निवास करने वाले प्रत्येक दादी–बाबा के लिए निःशुल्क आश्रय, वस्त्र, स्वास्थ्य–सुविधाएँ, पौष्टिक भोजन, तथा स्नेहपूर्ण देखभाल की संपूर्ण व्यवस्था की गई है। यहाँ का शांत वातावरण, भक्तिमय माहौल और सेवा–भाव से परिपूर्ण दिनचर्या बुजुर्गों को आत्मिक शांति व जीवन में पुनः उत्साह प्रदान करती है।

इस प्रकार यह वृद्धाश्रम केवल आश्रयगृह ही नहीं, बल्कि उन सभी वरिष्ठ जनों के लिए आध्यात्मिक उत्थान, आत्मसम्मान और सुखद जीवन का केंद्र बन चुका है, जहाँ वे आनंद, उल्लास और आराधना के साथ अपने जीवन के इस चरण को गरिमामय रूप से व्यतीत कर रहे हैं।
Add – Panchayat Dharamshala, Naimisharanya, Sitapur

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इस योजना के अन्तर्गत संस्था को जनपद हरदोई में 20 इण्डिया मार्का हैण्ड पम्प लगवाकर ग्रमीणों शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया गया जिसकी देखभाल संस्था द्वारा समय समय पर नियमित समयावधि में की जा रही है।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा अनुदानित काम काली महिला छात्रावास के प्रथम तथा द्वितीय चरण के पर्यवेक्षण में गठित समिति द्वारा सफलता पूर्वक कर लिया गया है यह कार्य पी० डब्ल्यू० डी० के मानकों के अनुरुप सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा अधिकृत अभियंता तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी हरदोई सहित पाँच सदस्यीय समिति की देख-रेख में सम्पन्न हुआ ।

1.नेत्र चिकित्सा शिविर में ऑपरेशन करते हुए चिकित्सकगण.
2.नेत्र चिकित्सा शिविर के समापन समारोह को सम्बोधित करते हुए डॉ० शिव बालक शुक्ल, श्री नीरज कुमार जिलाधिकारी हरदोई एवं मुख्य चिकित्साधिकारी हरदोई तथा डॉ० सुशीलचंद्र त्रिवेदी ‘मधुपेश’ जी

संस्थान ने सर्वप्रथम वर्ष 1991 में नेत्र चिकित्सा शिविर लगाया। हरदोई जनपद के विकास क्षेत्र बावन के अन्तर्गत ग्राम अल्लीपुर में लगाया गया था जिसमें आस पास के दूसरे विकास क्षेत्रों के ग्रामवासी काफी संख्या में लाभान्वित हुए थे।

वित्तीय वर्ष में स्ववित्त पोषित योजनान्तर्गत निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर जनपद के विकास क्षेत्र भरखनी पाली के पिपरी में लगाया गया जिसमें निकट के नेत्र रोगियों ने उचित परामर्श उपचार एवं निःशुल्क औषधियों के माध्यम से लाभार्जन किया। नयन ज्योति प्रदान करना एवं इस कार्यक्रम में सहायक होना नैतिक महत्व का कार्य हैं।

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1.नेत्र चिकित्सा शिविर में ऑपरेशन करते हुए चिकित्सकगण.
2.नेत्र चिकित्सा शिविर के समापन समारोह को सम्बोधित करते हुए डॉ० शिव बालक शुक्ल, श्री नीरज कुमार जिलाधिकारी हरदोई एवं मुख्य चिकित्साधिकारी हरदोई तथा डॉ० सुशीलचंद्र त्रिवेदी ‘मधुपेश’ जी

संस्थान ने सर्वप्रथम वर्ष 1991 में नेत्र चिकित्सा शिविर लगाया। हरदोई जनपद के विकास क्षेत्र बावन के अन्तर्गत ग्राम अल्लीपुर में लगाया गया था जिसमें आस पास के दूसरे विकास क्षेत्रों के ग्रामवासी काफी संख्या में लाभान्वित हुए थे।

वित्तीय वर्ष में स्ववित्त पोषित योजनान्तर्गत निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर जनपद के विकास क्षेत्र भरखनी पाली के पिपरी में लगाया गया जिसमें निकट के नेत्र रोगियों ने उचित परामर्श उपचार एवं निःशुल्क औषधियों के माध्यम से लाभार्जन किया। नयन ज्योति प्रदान करना एवं इस कार्यक्रम में सहायक होना नैतिक महत्व का कार्य हैं।

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परिवार कल्याण के क्षेत्र में विभिन्न रोगों के बचाव के प्रति जागरूकता, शिक्षा के प्रति जागरूकता, रहन-सहन प्रति जागरूकता तथा सामाजिक समानता के लिए कार्यक्रमों का आयोजन समय-समय पर किया जाता है।

विगत कई वर्षो से संस्थान द्वारा समाज के इस उपेक्षित वर्ग को सम्मानपूर्वक रहने एवं स्वयं आजीविका उपार्जित करने हेतु उन्हेंश्शैक्षिक एवं व्यावसासिक प्रशिक्षण हेतु जागरूक कराने के लिए कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

कृषकों के लिए गोष्ठी का आयोजन किया जिसके माध्यम से क्षेत्र के किसानों कों अच्छी उपज के लिये नवीन तकनीक के आधार पर कृषि करने हेतु प्रेरित किया जाता है साथ ही नये बीजों की किस्मों, खाद के प्रयोग के सम्बन्ध में जानकारी दी जाती है।

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संस्था द्वारा समय समय पर समाज में सांस्कृतिक स‌द्भावना को जागृति करने हेतु विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिसके द्वारा समाज प्रतिभागियों को जागरूक बनाने का कार्य एवं अपनी सांस्कृतिक विचार धारा के प्रवाह को प्रबल किया जाता है

नवग्रह वाटिका के वृक्षों की उपयोगिता पर आयोजित कार्यक्रम में डॉ० सुशीलचंद्र त्रिवेदी ‘मधुपेश’

संस्था ने अपने कुशल कार्यकर्ताओं द्वारा जनपद स्तर एवं ग्रामीण क्षेत्रों के निर्धन किसानों की भूमि पर वृक्षारोपण कर पर्यावरण को स्वच्छ रखनें में सहयोग प्रदान किया संस्था प्रतिवर्ष वन महोत्सव के अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में वृक्षारोपण कार्य कर रही है।

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प्रति वर्ष की भाँति इस वर्ष भी यातायात सप्ताह मनाया गया जनपद के विभिन्न मेलों में संस्थान के प्रशिक्षित अनुभवी स्वयं सेवकों ने सहायता सम्बन्धी नियमों के बारे मे जानकारी व उसके परिपालन की प्रेरणा दी साथ ही यातायात सम्बन्धी बोर्ड व बैनरों को लगवाया।

नवाबों का शहर लखनऊ, जिसे कभी नज़ाकत और नफ़ासत के लिए पहचाना जाता था, आज बढ़ती जनसंख्या और भौतिकवादी परिवेश के कारण तेजी से बदल रहा है। नई पीढ़ी आधुनिकता की दौड़ में इतनी व्यस्त होती जा रही है कि कई बार बुजुर्ग माता-पिता को अकेले जीवन यापन के लिए मजबूर होना पड़ता है। ऐसे में वे किसी ऐसे स्थान की तलाश में रहते हैं, जहाँ उनके अकेलेपन को दूर किया जा सके और उन्हें परिवार जैसा वातावरण मिले।
इसी उद्देश्य से सार्वजनिक शिक्षोन्नयन संस्थान ने अमौसी हवाई अड्डे के समीप, हैंड़िल नहर रोड, सरोजिनी नगर, लखनऊ में एक वृद्धाश्रम की स्थापना की है, जिसे समाज कल्याण विभाग द्वारा प्रायोजित किया गया है। यह आश्रम उन वयोवृद्ध दादी–बाबा के लिए आश्रयस्थल है, जो किसी भी कारणवश अपने जीवन के अंतिम समय में अकेले रह जाने को विवश हैं और जिन्हें देखभाल एवं अपनापन की आवश्यकता है।
उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण विभाग के माननीय मंत्री श्री रमापति शास्त्री जी ने भी इस संस्थान की गुणवत्ता की सराहना की है। इसके अलावा निदेशक समाज कल्याण, अपर निदेशक, सामाजिक कल्याण अधिकारी तथा स्थानीय जनप्रतिनिधि समय-समय पर आश्रम का निरीक्षण करते रहते हैं। अन्य कई स्वैच्छिक संस्थाएँ भी यहाँ आने वाले बुजुर्गों के लिए विविध कार्यक्रम आयोजित करती रहती हैं।
Address – Hiralal Dharamshala, Little Angel Inter College, N.Hadil Chauraha, Sarojini Nagar, Lucknow, Uttar Pradesh 226008

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कानपुर नगर, जो कभी औद्योगिक वैभव और कपड़ा मिलों की समृद्धि के लिए प्रसिद्ध था, समय के साथ मिलों के बंद होने के कारण गम्भीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करने लगा। परिणामस्वरूप वहाँ कार्यरत अनेक कर्मचारी बेरोजगार हो गए। आज वही लोग वृद्धावस्था में अत्यंत दयनीय परिस्थितियों—कठिन जीवन, दो समय के भोजन की चिंता और बेघर होने की पीड़ा—का सामना कर रहे हैं। अनेक बुजुर्ग तो भुखमरी के कगार पर पहुँच गए।

ऐसे ही ज़रूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षित, सम्मानजनक व स्नेहपूर्ण आश्रय प्रदान करने के उद्देश्य से सार्वजनिक शिक्षोन्नयन संस्थान द्वारा एक वृद्धाश्रम की स्थापना की गई। यह आश्रय स्थल वर्तमान में 136 दादी–बाबाओं का घर बन चुका है, जबकि कुल 150 संवासी पंजीकृत हैं। यह समाज कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा प्रायोजित एवं सहयोगित है।

आश्रम में बुजुर्गों की सुख–सुविधाओं और मनोरंजन का विशेष ध्यान रखा गया है।

मनोरंजन हेतु टीवी तथा कैरम, लूडो, चेस जैसे इंडोर गेम्स की व्यवस्था उपलब्ध है।

पूरा परिसर सीसीटीवी कैमरों से सुसज्जित है, जिससे सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

सभी वरिष्ठ नागरिकों के लिए सुबह के जागरण से लेकर रात्रि विश्राम तक एक सुचारु एवं स्वास्थ्यवर्धक दिनचर्या निर्धारित है।

मौसम और आवश्यकता के अनुसार तैयार किया गया पौष्टिक भोजन प्रतिदिन निःशुल्क प्रदान किया जाता है।

इसके अतिरिक्त, दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली आवश्यक वस्तुएँ भी आश्रम द्वारा निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं।

आत्मिक शांति एवं सकारात्मक वातावरण हेतु नियमित पूजन–भजन एवं धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

यह वृद्धाश्रम केवल एक आश्रय स्थल नहीं, बल्कि उन सभी बुजुर्गों के लिए सम्मान, सुरक्षा, सेवा और परिवार जैसे वातावरण का संगम है, जिन्होंने अपना पूरा जीवन समाज को समर्पित किया और आज स्नेह व सहयोग के पात्र हैं।
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सार्वजनिक शिक्षोन्नयन संस्थान द्वारा संचालित एवं समाज कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा प्रायोजित दतिया–ग्वालियर रोड स्थित वृद्धाश्रम क्षेत्र के लगभग 150 वयोवृद्ध जनों के लिए सुरक्षित एवं सम्मानपूर्ण आश्रय स्थल के रूप में कार्य कर रहा है। वर्तमान में यहाँ 134 पंजीकृत संवासी निवासरत हैं, जिन्हें संस्थान द्वारा सम्पूर्ण निःशुल्क सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं।

आश्रय गृह में प्रतिदिन सभी बुजुर्गों को पौष्टिक एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन, स्वच्छ आवास, नियमित चिकित्सा सेवाएँ तथा दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्री प्रदान की जाती है। इन सभी सेवाओं का उद्देश्य उन्हें आत्मनिर्भर, सुरक्षित तथा स्वास्थ्यपूर्ण जीवन प्रदान करना है।
नगरवासियों द्वारा होली, दिवाली एवं अन्य त्यौहारों के अवसर पर आश्रम में आकर बुजुर्गों के साथ समय बिताना एक संवेदनशील परंपरा के रूप में विकसित हो रहा है। उनकी उपस्थिति एवं सहयोग से आश्रम में धीरे–धीरे आत्मीयता और मानवीय जुड़ाव का वातावरण गहराता जा रहा है। जिन्होंने कभी जीवन से आशा खो दी थी, वे पुनः समाज के प्रेम और सम्मान को महसूस कर नई उमंग और उत्साह के साथ आशान्वित हो रहे हैं।
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गंगा और गोमती के पावन संगम क्षेत्र के मध्य स्थित पवित्र प्रह्लाद नगरी, हरदोई, नगर के कोलाहल से लगभग 10 किलोमीटर दूर, हरीतिमा से आच्छादित प्रकृति की अद्भुत, मनमोहक और शांत सुन्दरता से परिपूर्ण वातावरण में सार्वजनिक शिक्षोन्नयन संस्थान की पुण्यभूमि पर स्थापित “मातृ-पितृ छाया सदन”, अपनेपन की अनुभूति कराने वाला एक ऐसा पावन परिसर है जहाँ कदम रखते ही मन को सुकून और आत्मा को शांति मिलती है।

करीब 150 आश्रित बुजुर्गों के लिए यह आश्रम न सिर्फ एक आवास है, बल्कि स्नेह, सम्मान और आत्मिक आनंद की अविरल धारा बहाने वाला एक स्नेह-सरोवर है। यहाँ निवास करने वाले प्रत्येक वृद्ध जन को परिवार जैसा वात्सल्य, देखभाल और सुरक्षा प्राप्त होती है। आश्रम के प्रांगण में बुजुर्गों के चेहरों पर मुस्कान और उनके हृदयों में संतोष की लहरें निरंतर स्पंदित होती रहती हैं।
संस्थान द्वारा आश्रम में रहने वाले सभी बुजुर्गों को आवास, भोजन, चिकित्सा, मनोरंजन एवं दैनिक आवश्यकताओं की सभी सुविधाएँ पूरी तरह निःशुल्क प्रदान की जाती हैं। यह आश्रम समाज कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रायोजित एवं समर्थित है, जिससे यहाँ की व्यवस्था और सेवाएँ और भी अधिक सुव्यवस्थित एवं विश्वसनीय बनती हैं। मातृ-पितृ छाया सदन एक ऐसी दिव्य स्थली है जहाँ सेवा ही धर्म है, सम्मान ही संस्कृति है और बुजुर्गों की मुस्कान ही सबसे बड़ा आशीर्वाद।
Add – Public Educational Institute, Allipur, Hardoi

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अठ्ठासी हज़ार ऋषियों की तपस्थली, गोमती के पावन तट पर स्थित प्राकृतिक, शांत एवं दिव्य वातावरण के मध्य, निरंतर प्रवाहित चकतीर्थ के पवित्र जल के सान्निध्य में तथा देवी माँ के 51 शक्तिपीठों में प्रतिष्ठित माँ ललिता देवी मंदिर के मार्ग पर सार्वजनिक शिक्षोन्नयन संस्थान द्वारा समाज कल्याण विभाग के सहयोग से एक पवित्र एवं मानव–सेवा को समर्पित वृद्धाश्रम की स्थापना की गई है।

अपने सांसारिक कर्तव्यों की पूर्णता के पश्चात् ईश्वर-स्मरण एवं मन की स्थिरता की आकांक्षा लिए जब बुजुर्ग दादी–बाबा अपने पारिवारिक जीवन से अलग होकर या ईश्वरीय इच्छा के कारण आश्रयविहीन हो जाते हैं, तब यह दिव्य धाम उनके लिए जीवन का नया सहारा बनकर उभरता है। लगभग 150 वयोवृद्धों की सेवा का महान उत्तरदायित्व संस्थान के कर्मठ, संवेदनशील एवं समर्पित समाजसेवी कार्यकर्ता निष्ठा और करुणा के साथ दिन-रात निभा रहे हैं।
आश्रम में निवास करने वाले प्रत्येक दादी–बाबा के लिए निःशुल्क आश्रय, वस्त्र, स्वास्थ्य–सुविधाएँ, पौष्टिक भोजन, तथा स्नेहपूर्ण देखभाल की संपूर्ण व्यवस्था की गई है। यहाँ का शांत वातावरण, भक्तिमय माहौल और सेवा–भाव से परिपूर्ण दिनचर्या बुजुर्गों को आत्मिक शांति व जीवन में पुनः उत्साह प्रदान करती है।

इस प्रकार यह वृद्धाश्रम केवल आश्रयगृह ही नहीं, बल्कि उन सभी वरिष्ठ जनों के लिए आध्यात्मिक उत्थान, आत्मसम्मान और सुखद जीवन का केंद्र बन चुका है, जहाँ वे आनंद, उल्लास और आराधना के साथ अपने जीवन के इस चरण को गरिमामय रूप से व्यतीत कर रहे हैं।
Add – Panchayat Dharamshala, Naimisharanya, Sitapur

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इस योजना के अन्तर्गत संस्था को जनपद हरदोई में 20 इण्डिया मार्का हैण्ड पम्प लगवाकर ग्रमीणों शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया गया जिसकी देखभाल संस्था द्वारा समय समय पर नियमित समयावधि में की जा रही है।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा अनुदानित काम काली महिला छात्रावास के प्रथम तथा द्वितीय चरण के पर्यवेक्षण में गठित समिति द्वारा सफलता पूर्वक कर लिया गया है यह कार्य पी० डब्ल्यू० डी० के मानकों के अनुरुप सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा अधिकृत अभियंता तथा जिला कार्यक्रम अधिकारी हरदोई सहित पाँच सदस्यीय समिति की देख-रेख में सम्पन्न हुआ ।

1.नेत्र चिकित्सा शिविर में ऑपरेशन करते हुए चिकित्सकगण.
2.नेत्र चिकित्सा शिविर के समापन समारोह को सम्बोधित करते हुए डॉ० शिव बालक शुक्ल, श्री नीरज कुमार जिलाधिकारी हरदोई एवं मुख्य चिकित्साधिकारी हरदोई तथा डॉ० सुशीलचंद्र त्रिवेदी ‘मधुपेश’ जी

संस्थान ने सर्वप्रथम वर्ष 1991 में नेत्र चिकित्सा शिविर लगाया। हरदोई जनपद के विकास क्षेत्र बावन के अन्तर्गत ग्राम अल्लीपुर में लगाया गया था जिसमें आस पास के दूसरे विकास क्षेत्रों के ग्रामवासी काफी संख्या में लाभान्वित हुए थे।

वित्तीय वर्ष में स्ववित्त पोषित योजनान्तर्गत निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर जनपद के विकास क्षेत्र भरखनी पाली के पिपरी में लगाया गया जिसमें निकट के नेत्र रोगियों ने उचित परामर्श उपचार एवं निःशुल्क औषधियों के माध्यम से लाभार्जन किया। नयन ज्योति प्रदान करना एवं इस कार्यक्रम में सहायक होना नैतिक महत्व का कार्य हैं।

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1.नेत्र चिकित्सा शिविर में ऑपरेशन करते हुए चिकित्सकगण.
2.नेत्र चिकित्सा शिविर के समापन समारोह को सम्बोधित करते हुए डॉ० शिव बालक शुक्ल, श्री नीरज कुमार जिलाधिकारी हरदोई एवं मुख्य चिकित्साधिकारी हरदोई तथा डॉ० सुशीलचंद्र त्रिवेदी ‘मधुपेश’ जी

संस्थान ने सर्वप्रथम वर्ष 1991 में नेत्र चिकित्सा शिविर लगाया। हरदोई जनपद के विकास क्षेत्र बावन के अन्तर्गत ग्राम अल्लीपुर में लगाया गया था जिसमें आस पास के दूसरे विकास क्षेत्रों के ग्रामवासी काफी संख्या में लाभान्वित हुए थे।

वित्तीय वर्ष में स्ववित्त पोषित योजनान्तर्गत निःशुल्क नेत्र चिकित्सा शिविर जनपद के विकास क्षेत्र भरखनी पाली के पिपरी में लगाया गया जिसमें निकट के नेत्र रोगियों ने उचित परामर्श उपचार एवं निःशुल्क औषधियों के माध्यम से लाभार्जन किया। नयन ज्योति प्रदान करना एवं इस कार्यक्रम में सहायक होना नैतिक महत्व का कार्य हैं।

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परिवार कल्याण के क्षेत्र में विभिन्न रोगों के बचाव के प्रति जागरूकता, शिक्षा के प्रति जागरूकता, रहन-सहन प्रति जागरूकता तथा सामाजिक समानता के लिए कार्यक्रमों का आयोजन समय-समय पर किया जाता है।

विगत कई वर्षो से संस्थान द्वारा समाज के इस उपेक्षित वर्ग को सम्मानपूर्वक रहने एवं स्वयं आजीविका उपार्जित करने हेतु उन्हेंश्शैक्षिक एवं व्यावसासिक प्रशिक्षण हेतु जागरूक कराने के लिए कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

कृषकों के लिए गोष्ठी का आयोजन किया जिसके माध्यम से क्षेत्र के किसानों कों अच्छी उपज के लिये नवीन तकनीक के आधार पर कृषि करने हेतु प्रेरित किया जाता है साथ ही नये बीजों की किस्मों, खाद के प्रयोग के सम्बन्ध में जानकारी दी जाती है।

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संस्था द्वारा समय समय पर समाज में सांस्कृतिक स‌द्भावना को जागृति करने हेतु विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिसके द्वारा समाज प्रतिभागियों को जागरूक बनाने का कार्य एवं अपनी सांस्कृतिक विचार धारा के प्रवाह को प्रबल किया जाता है

नवग्रह वाटिका के वृक्षों की उपयोगिता पर आयोजित कार्यक्रम में डॉ० सुशीलचंद्र त्रिवेदी ‘मधुपेश’

संस्था ने अपने कुशल कार्यकर्ताओं द्वारा जनपद स्तर एवं ग्रामीण क्षेत्रों के निर्धन किसानों की भूमि पर वृक्षारोपण कर पर्यावरण को स्वच्छ रखनें में सहयोग प्रदान किया संस्था प्रतिवर्ष वन महोत्सव के अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में वृक्षारोपण कार्य कर रही है।

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प्रति वर्ष की भाँति इस वर्ष भी यातायात सप्ताह मनाया गया जनपद के विभिन्न मेलों में संस्थान के प्रशिक्षित अनुभवी स्वयं सेवकों ने सहायता सम्बन्धी नियमों के बारे मे जानकारी व उसके परिपालन की प्रेरणा दी साथ ही यातायात सम्बन्धी बोर्ड व बैनरों को लगवाया।

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