11.1.खुला आश्रय गृह (Open shelter Home)

खुला आश्रय गृह, दामोदर नगर कानपुर में लाभार्थी बच्चे।

समाज के भिखारियों, आवारा तथा कामकाजी बच्चों, कूड़ा बीनने वाले छोटे विक्रेताओं घूम-घूमकर तमाशा दिखाने वाले अनाथ लावारिस या गृहत्यागी 0-18 वर्षीय बच्चों को आश्रय देने के लिये। जो बच्चे बाल बन्दी नहीं माने जाते प्रत्युत बाल सुधार गृह की तरह उनके भोजन आवास एवं अन्य आवश्यक व्ययों का वहन करते हुये ब्रिज कोर्स शिक्षा पद्धति के माध्यम से शिक्षित-प्रशिक्षित करके ताकि उनका मावी जीवन सुखमय एवं समाजोपयोगी बने। महिला कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश का साहयता से 14 बर्ष तक आयु के उपेक्षित, निराश्रित, अनाथ एवं परित्यक्त बालक/बालिकाओं की देखरेख और संरक्षण प्रदान करने वाले आवासीय गृहों को किशोर न्याय (बालको की देख-रेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2000 (यथा संशोधित 2006) की धारा-34(3) एवं तत्संबंधी नियमावली के नियम-71 (1) के अन्तर्गत प्रमाण पत्र संख्या-0232/2013 दिनांक 25 मार्च 2013 पंजीकरण कराकर प्रदेश के कानपुर नगर में खुला आश्रय गृह कार्यक्रम (ओपेन सेल्टर होम) महिला निदेशालय उ०प्र० लखनऊ की स्वीकृत से संचालित किया गया। इस आश्रय गृह की क्षमता 25 अन्तःवासियों की है।

कस्तूरबा गाँधी आवासीय बालिका विद्यालय

भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक, रुढिवादी विचारों या अन्य विभिन्न कारणों से ग्रामीण परिवेश की 10 से 14 आयु वर्ग की बालिकायें जो पढाई की मुख्यधारा से अलग हो चुकी थी उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा में लाने के लिये भारत सरकार के सर्वशिक्षा अभियान के बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा इन ड्रापआउट किशोर बालिकाओं के लिये उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक 6 जनपदों के पिछडे विकास खण्डों में कस्तूरबा गाँधी आवासीय बालिका विद्यालय का गुणवत्तापूर्वक संचालन के कारण प्रदेश में कई बार सर्वश्रेष्ठ प्रबन्धन व संचालन के रुप में चयन कर अन्य संचालन करने वाले संगठनों को मॉडल के रुप में प्रस्तुत किया जाता रहा है। संचालित विद्यालयों में प्रति विद्यालय 100 बलिकाओं हेतु कुल 600 बलिकाओं हेतु निःशुल्क भोजन, आवास, वस्त्र, पाठ्य सामग्री, शिक्षण-प्रशिक्षण आदि की व्यवस्था उपलब्ध है –

1. विकास खण्ड – खुटार, जनपद- शाहजहाँपुर
2. विकास खण्ड-बबेरु, जनपद-बाँदा
3. विकास खण्ड- फतेहगंज प. जनपद-बरेली
4. विकास खण्ड पिनहट, जनपद-आगरा

5. विकास खण्ड- स्वार, जनपद-रामपुर
6. विकास खण्ड-फतेहपुर, जनपद-बाराबंकी

स्ट्रीट चिल्ड्रेन परियोजना के प्रशिक्षण केन्द्र में जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्रीमती रजनी सिंह एवं प्रबन्धक डॉ. सुशीलचंद्र त्रिवेदी 'मधुपेश', तथा लाभार्थी बच्चे

कानपुर उत्तर भारत को औद्योगिक नगरी होने कारण यहाँ पर विभिन्न औद्योगिक कारखानों में कार्य करने वाले श्रमिकों दैनिक मजदूरी करने वाले, रिक्शा चालकों का आदि का परिवार समान्यतः रेलवे लाइन के किनारे, ओवर ब्रिज के नीचे आदि स्थानों पर समूह में झग्गी-झोपडी में निवास करने वाले बच्चों को शिक्षा -11-8(4)/93-सी.डब्लू दिनांक-14.8.1993 द्वारा 100-100 बच्चों के 3 शिक्षण केन्द्र तथा 50 बच्चों का एक व पोषण उपलब्ध कराने हेत भारत सरकार के कल्याण मन्त्रालय, भारत सरकार के पत्र सं. व्यवसायिक प्रशिक्षण केन्द्र का संचालन कानपुर महानगर में सन् 1991 से 2012 तक सुचारु रुप से कर बच्चों को बेहतर भविष्य के लिये आधरभूत धरातल तैयार कर मुख्यधारा में लाने का सफल प्रयास किया।

व्यवसायिक का प्रशिक्षण प्राप्त करते हुये फर्रुखाबाद प्रशिक्षण केन्द्र के लाभार्थी बच्चे

बाल श्रमिकों विशेषकर उन बच्चों को जिन्हें कोई पारिवारिक सहारा नहीं होता अथवा नाम मात्र का सहारा होता है जैसे कि मलिन बस्तियों में सड़क के किनारे रहने वाले नशाखोरों के बच्चे, रेलवे प्लेटफार्म पर. रेलवे लाइन के किनारे ओवर ब्रिज के नीचे रह रहे बच्चों, दकानों, ढाबों मिस्त्री की दुकानों आदि पर कार्य करने वाले बच्चों, घरेल नौकर के रुप में कार्य कर रहे बच्चों कैदियों के बच्चे, प्रवासी श्रमिकों के बच्चे आदि समाजिक रूप से उपेक्षित तथा गरीब बच्चों को मोमबत्ती बनाने, सिलाई-कढाई, लिफाफा बनाना आदि कम लागत वाले व्यवसायिक शिक्षण-प्रशिक्षण प्रदान कर मुख्यधारा में जोडने के लिये महिला एवं बाल विकास मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा संस्था को पत्रांक सं.-20-50/2006-सीडब्लू ।। दिनांक 10 अगस्त 2007 दारा उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जनपद में प्रति वर्ष 100 लाभार्थी बच्चों हेतु सन् 2007 से 2015 तक सफलतापूर्वक संचालन कर सैकड़ों बच्चों को रोजगार हेतु प्रशिक्षण देकर समाज में स्थापित किया ।

परीक्षा पूर्व कोचिंग कॉलेज में अध्ययनरत् छात्र/छात्राएं

विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के करके कोचिंग से मार्गदर्शन प्राप्त हरदोई और उसके निकट सभी जिलों के सरकारी कार्यलयों में परीक्षा के आधार पर चयनित कर्मचारियों संस्थान का कोई न कोई विद्यार्थी अवश्य चनियनित हुये हैं साथ मेडिकल व इंजीनियरिंग परीक्षा पास कर आज देश सेवा में कार्यरत है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मन्त्रालय. माता सरकार की आर्थिक रुप से पिछड़े बच्चों की परीक्षा पूर्व कोचिंग हेतु पत्र सं.-4-16/2002-एम.सी. दिनांक-31.3. 2003 से परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केन्द्रो का संचालन अनुसूचित जाति के छात्र व छात्राओं को आई०एफ०सी०/पी०सी०एस० तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु कोचिंग केन्द्र संचालित किया कोचिंग केन्द्रों में प्रवेशित छात्र/छात्रओं को निःशुल्क कोविंग, भोजन, आवास, तथा लाइब्रेरी की सुविधा प्रदान की जाती है। इन कोचिंग केन्द्रों में प्रतिष्ठित संस्थानों, विश्वविद्यालयों तथा कोचिंग केन्द्रों से अतिथि व्याखाता लेक्चर हेतु आमंत्रित कर प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इसे और जुद्ध किया जायेगा जिससे की ज्यादा से ज्यादा प्रशिक्षणार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल कराने का प्रयास किया।

आवासीय ब्रिज कोर्स केन्द्र के समारोह में बच्चे को पुरस्कृत करते हुए मा० श्री हरिओम उपाध्याय मंत्री उ.प्र. सरकार, श्री पवन पुत्र बादल-प्रबन्धक राष्ट्रधर्म प्रकाशन तथा संस्थान प्रबन्धक- डॉ. सुशीलचंद्र त्रिवेदी 'मधुपेश

सर्व शिक्षा अभियान के अन्तर्गत उत्तर प्रदेश में आउट आफ स्कूल या ड्राप आउट जो आर्थिक व्यवस्था, शिक्षण केन्द्र से दूरी, शिक्षा के प्रति जागरुकता की कमी या अन्य सामाजिक परिस्थितिजन्य कारणों पढ़ाई छोड़ चुके ऐसे बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा में लाने के लिए राज्य परियोजना कार्यलय/साक्षरता एवं वैकल्पिक शिक्षा निदेशालय, उ.प्र., लखनऊ तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी 6 माह के आवासीय ब्रिज कोर्स केन्द्रों का संचालन जिसमें बच्चों को निःशुल्क शिक्षण के साथ-साथ निःशुल्क आवास, भोजन, चिकित्सा आदि आधारभूत सुविधाओं को देकर कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों शिक्षा देकर विद्यालयों में पंजीकृत कराकर शिक्षा की

मुख्य धारा में जोड़ने के लिये उत्तर में सार्वधिक ब्रिज कोर्स केन्द्रों के संचालन एवं प्रबन्धन द्वारा सन् 2006 से 2009 तक कुल लाभार्थी बच्चों की संख्या-3,960 शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ा गया। जिसमें निम्न 17 जनपदों में 22 आवासीय ब्रिज कोर्स केन्द्रों का संचालन किया-

1. हरदोई-4 केन्द्र
2. कानपुर देहात
3. इटावा
4. सीतापुर
5.बाराबंकी
6.बहराइच-2 केन्द्र
7. मुरादाबाद
8.शाहजहाँपुर
9.गोण्डा
10. आगरा
11.फिरोजाबाद
12.लखनऊ
13. बलरामपुर
14.रामपुर
15.बरेली
16. कन्नौज
17.झाँसी..

गैर आवासीय ब्रिज कोर्स केन्द्र में विभिन्न कार्यक्रमों में सहभाग करते लाभार्थी बच्चे तथा मार्गदर्शक संस्थान प्रबन्धक डॉ. सुशीलचंद्र त्रिवेदी 'मधुपेश' तथा अतिथिगण।

समाज के 11-14 वय वर्ग के बच्चे जो परिस्थितियों के कारण कक्षा 1 से 5 तक की पढ़ाई छोड़ के थे पुनः शिक्षा की मुख्यधारा में लाने के सन् 2007 से 2009 के मध्य राज्य परियोजना कार्यलय/ साक्षरता एवं वैकल्पिक शिक्षा निदेशालय, उ.प्र. लखनऊ तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के निर्देशानुसार उत्तर प्रदेश के हरदोई, सीतापुर, बाराबंकी, कानपुर, आदि 14 जनपदों में गैर आवासीय ब्रिज कोर्स केन्द्रों का संवालन सफलता पूर्वक किया गया जिसमें कुल लाभार्थी 2.040 बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ा गया ।

शिशु सदन

उ.प्र. नियन्त्रण बोर्ड महिला एवं बाल विकास, लखनऊ के पत्रांक सं-1401-02/नि बो/92-93 दिनांक 27 जनवरी 1993 से मान्यता प्राप्त करके अनाथालय और अन्य पूर्त आश्रम (पर्यवेक्षण और नियन्त्रण) अधिनियम 1960 की धारा 15 (1) द्वारा प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करके दिये गये निर्देशों का पालन करते हुये 10 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के बालक/बालिकाओं 50 संख्या के शिशु सदन का संचालन सफलता पूर्वक किया गया ।

प्रौढ़ शिक्षा केन्द्र

जिन प्रौढ़ व्यक्तियों ने शिक्षा प्राप्त करने का अवसर गवाँ दिया तथा औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने की आयु पार कर चुके हैं। लेकिन अब वे साक्षरता, आधारभूत शिक्षा, कौशल विकास, व्यवसायिक शिक्षा, और इसी तरह की अन्य शिक्षा सहित किसी तरह के ज्ञान की आवश्यकता का अनुभव करते हैं। प्रौढ़ शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये सन् 1994 से 1995 तक कुल लाभार्थी बच्चों की संख्या 10,946 कल्याण मन्त्रालय, भारत सरकार नई दिल्ली के सहयोग से प्रौढ़ शिक्षा केन्द्रों का संचालन किया।

राष्ट्रीय अनौपचारिक शिक्षा

सन् 1990 से 2000 तक कुल लाभार्थी बच्चों की संख्या 12,490, मानव संसाधन विकास मन्त्रालय (शिक्षा विभाग), भारत सरकार नई दिल्ली पत्रांक-8-7/92-एन.एफ.ई.।।। दिनांक-1.10.1991 हरदोई। सभी आयु के वे व्यक्ति आते हैं जिन्हें औपचारिक शिक्षा प्राप्त करने का अवसर सभी भी नहीं मिला। जो विद्यार्थी प्राथमिक अथवा माध्यमिक शिक्षा पूरी नहीं कर सकें। जो शिक्षा की विभिन्न अवस्थाओं में विशेष रूचि के विषय में अधिक गहरे और व्यापक ज्ञान की आवश्यकता अनुभव करतें है। नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रो में युवा अमिक, छोटे किसान, भूमिहीन किसान, छोटे व्यवसायी इत्यादि जिनको अपने कार्यों के विषय में प्राविधिक विकास एवं नवीनतम ज्ञान को जानने की आवश्यकता है विभिन्न आयु समूह के बेरोजगारों शिक्षित व्यक्ति जिनकी अप्रांसगिक शिक्षा को अधिक अप्रासंगिक बनानें की आवश्यकता है ताकि उनके राजगार के अवसर बढाये जा सकें । ग्रेजुएट, व्यवसायिक वर्ग तथा बुद्धिजीवी-जिन्हें अपने ज्ञान को नवीनतम रूप देने के लिए विशिष्ट रिफ्रेशर पाठ्यक्रमों की आवश्यकता है। वे लोग जिन्हें मनोरजंन, अवकाश की क्रियाओं और सांस्कृतिक अथवा कलात्मक कार्यक्रमों की आवश्यकता है।

पूर्व प्रारम्भिक शिशु शिक्षा केन्द्र

भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मन्त्रालय (महिला एवं बाल विकास विभाग), भारत सरकार नई दिल्ली पत्रांक-11-13/97-एन.टीई.सी. ई.) दिनांक-20.11.1998 मन्त्रालय से हरदोई जनपद के बाबन व हरियाँवा ब्लाक सन् 1988 से 2001 तक कुल लाभार्थी 3-6 आयु वर्ग के बच्चों के 50 केन्द्र संचालित किये गये।

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