11.12 उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन


उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन

जगार परक प्रशिक्षण के अन्तर्गत कौशल विकास मन्त्रालय के सहयोग से सन् 2015 से उत्तर प्रदेश कौशल कास मिशन योजना के अन्तगर्त बहराइच, बाराबंकी, गाजियाबाद, लखीमपुर खीरी, तथा सीतापुर जनपदों 17 केन्द्रों के माध्यम से सन् 2017 तक 153 बैचों में 3.827 लाभार्थियों को प्रशिक्षित कर रोजगार उपलब्ध राया है। इस योजना के अन्तर्गत लाभार्थियों को निम्नलिखित प्रशिक्षण दिया गया।

1.कम्प्यूटर सेक्टर
2.रिटेल सेक्टर
3.टेली-एकाउन्टिंग सेक्टर
4.इलेक्ट्रिक सेक्टर
5.हास्पेलिटी सेक्ट

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आँगनवाड़ी प्रशिक्षण केन्द्र में आँगनवाड़ी कार्यकत्रियों को प्रमाण-पत्र वितरित करते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी

उ०प्र० महिला विकास विभाग से प्रायोजित ऑगनवाड़ी कार्यकत्री आवासीय प्रशिक्षण केन्द्र का सफल संचालन किया गया जिसमें जिसमें ऑगवाडी केन्द्र संचालन की सभी महत्वपूर्ण जानकारियों के प्रशिक्षण के उपरान्त श्री प्रकाश कुमार जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा प्रमाण पत्र वितरित किये गये ।

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किशोरी शक्ति योजना के अन्तर्गत व प्रशिक्षण प्राप्त करती हुई किशोरी बालिकाएं

जनपद गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद की 11-18 वर्ष के आयु वर्ग की बालिकाओं की पौषणिक एंव स्वास्थय स्थिति में सुधार कर किशोरियों को अधिकाधिक सामाजिक अनुभव एवं ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रेरित करने तथा उन्हें अपनी निर्णय निर्माण क्षमताओं में सुधार करने में सहायता प्रदान करने के उदद्देश्य से अनौपचारिक शिक्षा के माध्यम से उन्हें अंक एवं साक्षरता प्रदान कर किशोरियों को उनके घरेलू एवं व्यावसायिक कौशलों में सुधार उन्नयन करने के लिये प्रशिक्षित करना एवं साधन संपन्न बनाने किशोरियों में स्वास्थय एवं साफ सफाई पोषण एवं परिवार कल्याण गृह प्रबंधन तथा बाल देखभाल संबधी जागरूकता को बढ़ावा देने तथा उनके आस पास के सामाजिक मुद्दों और उनके जीवन पर इन मुद्दों के प्रभाव को बेहतर ढंग से समझना तथा किशोरियों को समाज की आर्थिक दृष्टि से उपादेय एंव उपयोगी सदस्य बनने के लिये प्ररित कर किशोरी बालिकाओं हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम के अन्तर्गत उ.प्र. महिला कल्याण निगम लि०, लखनऊ के पत्रांक सं.-2643/61-62/म.क.नि./2010-11 दिनांक-26.02.2011 के निर्देशानुसार प्रशिक्षण देकर स्वावलम्बी बनाया गया ।

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किशोरी बालिका सशक्तिकरण योजना में प्रशिक्षण प्राप्त करती हुई किशोरी बालिकाएं

11 से 18 आयु वर्ग की किशोर बालिकाओं प्रशिक्षण कार्यक्रम (सबला) के अन्तर्गत संस्था उत्तर प्रदेश के जनपद ललितपुर और मुरादाबाद और सहारनपुर में उ.प्र. महिला लखनऊ के पत्रांक सं. चाण निगम लि०, ल 1346/म.क.नि./2010-1 दिनांक-17.01.2011 के निर्देशानुसार प्रशिकित किया गया। इस योजना के तहत बालिकाओं को आयु के आधार 11-14 वर्ष तथा 11-18 वर्ष के ग्रुप में भाजित कर दिया गया। जिससे उनको आयु के आधार पर प्रशिक्षण दिया गया। इस योजना के तहत किशोरियों तथा युवा बालिकाओ को उनके नाम स्वास्थ हेतु उनके लम्बाई के अनुपात में वजन तथा हरमोन के बदलाव के कारण शरीर के आवश्यक पोषण तत्वों की आवश्यकता की जानकारी देना है। किशोरावस्था के दौरान स्वास्थ, पोषण तथा प्रजनन तंत्र और यौन स्वास्थ, एडोलसेंट रिप्रोडक्टिव एंड सेक्सुअल हेल्थ ki जानकारी देना। युवा बालिकाओं को परिवार या शिशु की देख-रेख सम्बन्धी जानकारी देना युवा बालिकाओं के आत्मविकास और सशक्तिकरण हेतु उन्हें जागरूक करना। युवा और कशोरी बालिकाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने हेतु उन्हें प्राइमरी हेल्थ केयर चाइल्ड हेल्थ केयर, डाक घर पोस्ट ऑफिस, पुलिस चौकी, पुलिस स्टेशन तथा बैंक आदि के विषय में जानकारी देना।

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हैण्ड ब्लाक एवं स्प्रे पेटिंग प्रशिक्षण केन्द्र

शिक्षण के साथ रोजगार सृजन के लिये बच्चों को स्वावलम्बी बनाने हेतु 50-50 प्रशिक्षणार्थी प्रति वर्ष हेतु सन् 1994 में कल्याण मन्त्रालय, भारत सरकार नई दिल्ली से के सहयोग से जनपद-हरदोई में हैण्ड ब्लाक तथा स्प्रे पेटिंग प्रशिक्षण केन्द्र प्रारम्भ किया गया जिसमें सन् 1999 तक कुल लामाथी बच्चों की संख्या हैण्ड ब्लाक-298, स्प्रे पेटिंग-296 रही उसके बाद प्रशिक्षण कंन्द्र का सचालन स्ववित्तपोषित रुप से सचालति रहा।

मलिन बस्ती परियोजना

कानपुर उत्तर भारत को औद्योगिक नगरी होने कारण यहाँ पर विभिन्न औद्योगिक कारखानों में कार्य करने वाले श्रमिकों, दैनिक मजदूरी करने वाले, रिक्शा चालकों का आदि का परिवार समान्यतः रेलवे लाइन के किनारे, ओवर ब्रिज के नीचे आदि स्थानों पर समूह में झुग्गी-झोपड़ी में निवास करने वाले बच्चों को शिक्षा व पोषण उपलब्ध कराने हेतु भारत सरकार के कल्याण मन्त्रालय, भारत सरकार के पत्र सं. -11-8(4)/93-सी.डब्लू दिनांक-14.8.1993 द्वारा 100-100 बच्चों के 3 शिक्षण केन्द्र तथा 50 बच्चों का एक व्यवसायिक प्रशिक्षण केन्द्र का संचालन कानपुर महानगर में सन् 1991 से 2012 तक सुचारु रुप से कर बच्चों को बेहतर भविष्य के लिये आधरभूत धरातल तैयार कर मुख्यधारा में लाने का सफल प्रयास किया।

देखरेख और संरक्षण के जरुरतमंद कामकाजी बच्चों के कल्याण की परियोजना

बाल श्रमिकों विशेषकर उन बच्चों को जिन्हें कोई पारिवारिक सहारा नहीं होता अथवा नाम मात्र का सहारा होता है जैसे कि मलिन बस्तियों में, सड़क के किनारे रहने वाले, नशाखोरों के बच्चे, रेलवे प्लेटफार्म पर, रेलवे लाइन के किनारे, ओवर ब्रिज के नीचे रह रहे बच्चों, दुकानों, ढाबों, मिस्त्री की दुकानों आदि पर कार्य करने वाले बच्चों, घरेलू नौकर के रुप में कार्य कर रहे बच्चों, कैदियों के बच्चे, प्रवासी श्रमिकों के बच्चे आदि समाजिक रुप से उपेक्षित तथा गरीब बच्चों को मोमबत्ती बनाने, सिलाई-कढ़ाई, लिफाफा बनाना आदि कम लागत वाले व्यवसायिक शिक्षण-प्रशिक्षण प्रदान कर मुख्यधारा में जोड़ने के लिये महिला एवं बाल विकास मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा संस्था को पत्रांक सं.-20-50/2006-सीडब्लू- ।। दिनांक 10 अगस्त 2007 द्वारा उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जनपद में प्रति वर्ष 100 लाभार्थी बच्चों हेतु सन् 2007 से 2015 तक सफलतापूर्वक संचालन कर सैकड़ों बच्चों को रोजगार हेतु प्रशिक्षण देकर समाज में स्थापित किया ।

कम्प्यूटर प्रशिक्षण कार्यक्रम

वर्तमान सदी में बदलते विज्ञान युग में Computer Dainik जीवन का आवश्यक ang बन गया jisme बच्चों के ज्ञान के साथ-साथ रोजगार परक शिक्षण के लिये भारत सरकार के कल्याण mantralaya पत्रांक संख्या-11020/75/92-SCD-III Dinank 26.3.1993 द्वारा कम्प्यूटर प्रशिक्षण pariyojna का संचालन अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति हेतु किया गया। यह कई वर्षों तक भारत सरकार के अनुदान से sanchalit रही है कम्प्यूटर प्रशिक्षण केन्द्र अपने कर्मियों की कर्मठता सक्रियता एवं निष्ठा के कारण satat सफल होता रहा है जिससे इस केन्द्र का naam जनपद में कॉफी विख्यात हो गया है अतः जब bharat सरकार ने इसके लिये अनुदान देना बन्द कर दिया तो संस्थान ने apne साधनों से सभी वर्गो के labharthiyo ke liye ise sanchalit rakha.
कम्प्यूटर प्रशिक्षण केन्द्र मे समय की माँग के अनुरुप कई प्रोग्राम संचालित किये गये। गरीबी से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के प्रशिक्षुओं को देखतें हुए प्रशिक्षुओं कों व्यवसायिक कार्यों के काम आने वाले प्रोग्राम भी सिखायें गये।

इस समय वर्तमान में डी०सी०ए० – ए०डी०सी०ए० एवं पी०जी०डी०सी०पी० कोर्स का प्रशिक्षण दिया जा रहा है प्रति वर्ष की भाँति इस वर्ष भी सैकड़ो प्रशिक्षुओं ने लाभार्जन किया है।

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उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन

जगार परक प्रशिक्षण के अन्तर्गत कौशल विकास मन्त्रालय के सहयोग से सन् 2015 से उत्तर प्रदेश कौशल कास मिशन योजना के अन्तगर्त बहराइच, बाराबंकी, गाजियाबाद, लखीमपुर खीरी, तथा सीतापुर जनपदों 17 केन्द्रों के माध्यम से सन् 2017 तक 153 बैचों में 3.827 लाभार्थियों को प्रशिक्षित कर रोजगार उपलब्ध राया है। इस योजना के अन्तर्गत लाभार्थियों को निम्नलिखित प्रशिक्षण दिया गया।

1.कम्प्यूटर सेक्टर
2.रिटेल सेक्टर
3.टेली-एकाउन्टिंग सेक्टर
4.इलेक्ट्रिक सेक्टर
5.हास्पेलिटी सेक्ट

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आँगनवाड़ी प्रशिक्षण केन्द्र में आँगनवाड़ी कार्यकत्रियों को प्रमाण-पत्र वितरित करते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी

उ०प्र० महिला विकास विभाग से प्रायोजित ऑगनवाड़ी कार्यकत्री आवासीय प्रशिक्षण केन्द्र का सफल संचालन किया गया जिसमें जिसमें ऑगवाडी केन्द्र संचालन की सभी महत्वपूर्ण जानकारियों के प्रशिक्षण के उपरान्त श्री प्रकाश कुमार जिला कार्यक्रम अधिकारी द्वारा प्रमाण पत्र वितरित किये गये ।

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किशोरी शक्ति योजना के अन्तर्गत व प्रशिक्षण प्राप्त करती हुई किशोरी बालिकाएं

जनपद गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद की 11-18 वर्ष के आयु वर्ग की बालिकाओं की पौषणिक एंव स्वास्थय स्थिति में सुधार कर किशोरियों को अधिकाधिक सामाजिक अनुभव एवं ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रेरित करने तथा उन्हें अपनी निर्णय निर्माण क्षमताओं में सुधार करने में सहायता प्रदान करने के उदद्देश्य से अनौपचारिक शिक्षा के माध्यम से उन्हें अंक एवं साक्षरता प्रदान कर किशोरियों को उनके घरेलू एवं व्यावसायिक कौशलों में सुधार उन्नयन करने के लिये प्रशिक्षित करना एवं साधन संपन्न बनाने किशोरियों में स्वास्थय एवं साफ सफाई पोषण एवं परिवार कल्याण गृह प्रबंधन तथा बाल देखभाल संबधी जागरूकता को बढ़ावा देने तथा उनके आस पास के सामाजिक मुद्दों और उनके जीवन पर इन मुद्दों के प्रभाव को बेहतर ढंग से समझना तथा किशोरियों को समाज की आर्थिक दृष्टि से उपादेय एंव उपयोगी सदस्य बनने के लिये प्ररित कर किशोरी बालिकाओं हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम के अन्तर्गत उ.प्र. महिला कल्याण निगम लि०, लखनऊ के पत्रांक सं.-2643/61-62/म.क.नि./2010-11 दिनांक-26.02.2011 के निर्देशानुसार प्रशिक्षण देकर स्वावलम्बी बनाया गया ।

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किशोरी बालिका सशक्तिकरण योजना में प्रशिक्षण प्राप्त करती हुई किशोरी बालिकाएं

11 से 18 आयु वर्ग की किशोर बालिकाओं प्रशिक्षण कार्यक्रम (सबला) के अन्तर्गत संस्था उत्तर प्रदेश के जनपद ललितपुर और मुरादाबाद और सहारनपुर में उ.प्र. महिला लखनऊ के पत्रांक सं. चाण निगम लि०, ल 1346/म.क.नि./2010-1 दिनांक-17.01.2011 के निर्देशानुसार प्रशिकित किया गया। इस योजना के तहत बालिकाओं को आयु के आधार 11-14 वर्ष तथा 11-18 वर्ष के ग्रुप में भाजित कर दिया गया। जिससे उनको आयु के आधार पर प्रशिक्षण दिया गया। इस योजना के तहत किशोरियों तथा युवा बालिकाओ को उनके नाम स्वास्थ हेतु उनके लम्बाई के अनुपात में वजन तथा हरमोन के बदलाव के कारण शरीर के आवश्यक पोषण तत्वों की आवश्यकता की जानकारी देना है। किशोरावस्था के दौरान स्वास्थ, पोषण तथा प्रजनन तंत्र और यौन स्वास्थ, एडोलसेंट रिप्रोडक्टिव एंड सेक्सुअल हेल्थ ki जानकारी देना। युवा बालिकाओं को परिवार या शिशु की देख-रेख सम्बन्धी जानकारी देना युवा बालिकाओं के आत्मविकास और सशक्तिकरण हेतु उन्हें जागरूक करना। युवा और कशोरी बालिकाओं को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने हेतु उन्हें प्राइमरी हेल्थ केयर चाइल्ड हेल्थ केयर, डाक घर पोस्ट ऑफिस, पुलिस चौकी, पुलिस स्टेशन तथा बैंक आदि के विषय में जानकारी देना।

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हैण्ड ब्लाक एवं स्प्रे पेटिंग प्रशिक्षण केन्द्र

शिक्षण के साथ रोजगार सृजन के लिये बच्चों को स्वावलम्बी बनाने हेतु 50-50 प्रशिक्षणार्थी प्रति वर्ष हेतु सन् 1994 में कल्याण मन्त्रालय, भारत सरकार नई दिल्ली से के सहयोग से जनपद-हरदोई में हैण्ड ब्लाक तथा स्प्रे पेटिंग प्रशिक्षण केन्द्र प्रारम्भ किया गया जिसमें सन् 1999 तक कुल लामाथी बच्चों की संख्या हैण्ड ब्लाक-298, स्प्रे पेटिंग-296 रही उसके बाद प्रशिक्षण कंन्द्र का सचालन स्ववित्तपोषित रुप से सचालति रहा।

मलिन बस्ती परियोजना

कानपुर उत्तर भारत को औद्योगिक नगरी होने कारण यहाँ पर विभिन्न औद्योगिक कारखानों में कार्य करने वाले श्रमिकों, दैनिक मजदूरी करने वाले, रिक्शा चालकों का आदि का परिवार समान्यतः रेलवे लाइन के किनारे, ओवर ब्रिज के नीचे आदि स्थानों पर समूह में झुग्गी-झोपड़ी में निवास करने वाले बच्चों को शिक्षा व पोषण उपलब्ध कराने हेतु भारत सरकार के कल्याण मन्त्रालय, भारत सरकार के पत्र सं. -11-8(4)/93-सी.डब्लू दिनांक-14.8.1993 द्वारा 100-100 बच्चों के 3 शिक्षण केन्द्र तथा 50 बच्चों का एक व्यवसायिक प्रशिक्षण केन्द्र का संचालन कानपुर महानगर में सन् 1991 से 2012 तक सुचारु रुप से कर बच्चों को बेहतर भविष्य के लिये आधरभूत धरातल तैयार कर मुख्यधारा में लाने का सफल प्रयास किया।

देखरेख और संरक्षण के जरुरतमंद कामकाजी बच्चों के कल्याण की परियोजना

बाल श्रमिकों विशेषकर उन बच्चों को जिन्हें कोई पारिवारिक सहारा नहीं होता अथवा नाम मात्र का सहारा होता है जैसे कि मलिन बस्तियों में, सड़क के किनारे रहने वाले, नशाखोरों के बच्चे, रेलवे प्लेटफार्म पर, रेलवे लाइन के किनारे, ओवर ब्रिज के नीचे रह रहे बच्चों, दुकानों, ढाबों, मिस्त्री की दुकानों आदि पर कार्य करने वाले बच्चों, घरेलू नौकर के रुप में कार्य कर रहे बच्चों, कैदियों के बच्चे, प्रवासी श्रमिकों के बच्चे आदि समाजिक रुप से उपेक्षित तथा गरीब बच्चों को मोमबत्ती बनाने, सिलाई-कढ़ाई, लिफाफा बनाना आदि कम लागत वाले व्यवसायिक शिक्षण-प्रशिक्षण प्रदान कर मुख्यधारा में जोड़ने के लिये महिला एवं बाल विकास मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा संस्था को पत्रांक सं.-20-50/2006-सीडब्लू- ।। दिनांक 10 अगस्त 2007 द्वारा उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जनपद में प्रति वर्ष 100 लाभार्थी बच्चों हेतु सन् 2007 से 2015 तक सफलतापूर्वक संचालन कर सैकड़ों बच्चों को रोजगार हेतु प्रशिक्षण देकर समाज में स्थापित किया ।

कम्प्यूटर प्रशिक्षण कार्यक्रम

वर्तमान सदी में बदलते विज्ञान युग में Computer Dainik जीवन का आवश्यक ang बन गया jisme बच्चों के ज्ञान के साथ-साथ रोजगार परक शिक्षण के लिये भारत सरकार के कल्याण mantralaya पत्रांक संख्या-11020/75/92-SCD-III Dinank 26.3.1993 द्वारा कम्प्यूटर प्रशिक्षण pariyojna का संचालन अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति हेतु किया गया। यह कई वर्षों तक भारत सरकार के अनुदान से sanchalit रही है कम्प्यूटर प्रशिक्षण केन्द्र अपने कर्मियों की कर्मठता सक्रियता एवं निष्ठा के कारण satat सफल होता रहा है जिससे इस केन्द्र का naam जनपद में कॉफी विख्यात हो गया है अतः जब bharat सरकार ने इसके लिये अनुदान देना बन्द कर दिया तो संस्थान ने apne साधनों से सभी वर्गो के labharthiyo ke liye ise sanchalit rakha.
कम्प्यूटर प्रशिक्षण केन्द्र मे समय की माँग के अनुरुप कई प्रोग्राम संचालित किये गये। गरीबी से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के प्रशिक्षुओं को देखतें हुए प्रशिक्षुओं कों व्यवसायिक कार्यों के काम आने वाले प्रोग्राम भी सिखायें गये।

इस समय वर्तमान में डी०सी०ए० – ए०डी०सी०ए० एवं पी०जी०डी०सी०पी० कोर्स का प्रशिक्षण दिया जा रहा है प्रति वर्ष की भाँति इस वर्ष भी सैकड़ो प्रशिक्षुओं ने लाभार्जन किया है।

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